विश्व में हिंदू राष्ट्र कितने हैं

जब लोग कहते हैं कि विश्व में केवल एक ही हिन्दू देश है तो यह पूरी तरह गलत है यह बात केवल वे ही कह सकते हैं जो हिन्दू की परिभाषा को नहीं जानते...

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Dec 23, 2010, 6:15:07 PM12/23/10

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जब लोग कहते हैं कि विश्व में केवल एक ही हिन्दू देश है तो यह पूरी तरहगलत है यह बात केवल वे ही कह सकते हैं जो हिन्दू की परिभाषा को नहींजानते । इसके लिए सबसे पहले हमें यह जानना होगा कि हिन्दू की परिभाषाक्या है ।हिन्दुत्व की जड़ें किसी एक पैगम्बर पर टिकी न होकर सत्य, अहिंसासहिष्णुता, ब्रह्मचर्य , करूणा पर टिकी हैं । हिन्दू विधि के अनुसारहिन्दू की परिभाषा नकारात्मक है परिभाषा है जो ईसाई मुसलमान व यहूदी नहींहै वे सब हिन्दू है। इसमें आर्यसमाजी, सनातनी, जैन सिख बौद्ध इत्यादि सभीलोग आ जाते हैं । एवं भारतीय मूल के सभी सम्प्रदाय पुर्नजन्म में विश्वासकरते हैं और मानते हैं कि व्यक्ति के कर्मों के आधार पर ही उसे अगला जन्ममिलता है । तुलसीदास जीने लिखा है परहित सरिस धरम नहीं भाई । पर पीड़ा समनहीं अधमाई । अर्थात दूसरों को दुख देना सबसे बड़ा अधर्म है एवं दूसरों कोसुख देना सबसे बड़ा धर्म है । यही हिन्दू की भी परिभाषा है । कोई व्यक्तिकिसी भी भगवान को मानते हुए, एवं न मानते हुए हिन्दू बना रह सकता है ।हिन्दू की परिभाषा को धर्म से अलग नहीं किया जा सकता । यही कारण है किभारत में हिन्दू की परिभाषा में सिख बौद्ध जैन आर्यसमाजी सनातनी इत्यादिआते हैं । हिन्दू की संताने यदि इनमें से कोई भी अन्य पंथ अपना भी लेतीहैं तो उसमें कोई बुराई नहीं समझी जाती एवं इनमें रोटी बेटी का व्यवहारसामान्य माना जाता है । एवं एक दूसरे के धार्मिक स्थलों को लेकर कोई झगड़ाअथवा द्वेष की भावना नहीं है । सभी पंथ एक दूसरे के पूजा स्थलों पर आदरके साथ जाते हैं । जैसे स्वर्ण मंदिर में सामान्य हिन्दू भी बड़ी संख्यामें जाते हैं तो जैन मंदिरों में भी हिन्दुओं को बड़ी आसानी से देखा जासकता है । जब गुरू तेग बहादुर ने कश्मीरी पंडितो के बलात धर्म परिवर्तनके विरूद्ध अपना बलिदान दिया तो गुरू गोविन्द सिंह ने इसे तिलक व जनेउ केलिए उन्होंने बलिदान दिया इस प्रकार कहा । इसी प्रकार हिन्दुओं ने भगवानबुद्ध को अपना 9वां अवतार मानकर अपना भगवान मान लिया है । एवं भगवानबुद्ध की ध्यान विधि विपश्यना को करने वाले अधिकतम लोग आज हिन्दू ही हैंएवं बुद्ध की शरण लेने के बाद भी अपने अपने घरों में आकर अपने हिन्दूरीतिरिवाजों को मानते हैं । इस प्रकार भारत में फैले हुए पंथों को किसीभी प्रकार से विभक्त नहीं किया जा सकता एवं सभी मिलकर अहिंसा करूणामैत्री सद्भावना ब्रह्मचर्य को ही पुष्ट करते हैं ।इसी कारण कोई व्यक्ति चाहे वह राम को माने या कृष्ण को बुद्ध को यामहावीर को अथवा गोविन्द सिंह को परंतु यदि अहिंसा, करूणा मैत्री सद्भावनाब्रह्मचर्य, पुर्नजन्म, अस्तेय, सत्य को मानता है तो हिन्दू ही है । इसीकारण जब पूरे विश्व में 13 देश हिन्दू देशों की श्रेणी में आएगें । इनमेंवे सब देश है जहाँ बौद्ध पंथ है । भगवान बुद्ध द्वारा अन्य किसी पंथ कोनहीं चलाया गया उनके द्वारा कहे गए समस्त साहित्य में कहीं भी बौद्ध शब्दका प्रयोग नहीं हुआ है । उन्होंने सदैव इस धर्म कहा । भगवान बुद्ध नेकिसी भी नए सम्प्रदाय को नहीं चलाया उन्होनें केवल मनुष्य के अंदरश्रेष्ठ गुणों को लाने उन्हें पुष्ट करने के लिए ध्यान की पुरातन विधिविपश्यना दी जो भारत की ध्यान विधियों में से एक है जो उनसे पहले सम्यकसम्बुद्ध भगवान दीपंकर ने भी हजारों वर्ष पूर्व विश्व को दी थी । एवंभगवान दीपंकर से भी पूर्व न जाने कितने सम्यंक सम्बुद्धों द्वारा यहीध्यान की विधि विपश्यना सारे संसार को समय समय पर दी गयी ( एसा स्वयंभगवान बुद्ध द्वारा कहा गया है । भगवान बुद्ध ने कोई नया पंथ नहीं चलायावरन् उन्होंने मानवीय गुणों को अपने अंदर बढ़ाने के लिए अनार्य से आर्यबनने के लिए ध्यान की विधि विपश्यना दी जिससे करते हुए कोई भी अपनेपुराने पंथ को मानते हुए रह सकता है । परंतु विधि के लुप्त होने के बादविपश्यना करने वाले लोगों के वंशजो ने अपना नया पंथ बना लिया । परतुं यहबात विशेष है कि इस ध्यान की विधि के कारण ही भारतीय संस्कृति का फैलावविश्व के 21 से भी अधिक देशों में हो गया एवं ११ देशों में बौद्धों कीजनसंख्या अधिकता में हैं ।हिन्दुत्व व बौद्ध मत में समानताएं -१- दोनों ही कर्म में पूरी तरह विश्वास रखते हैं । दोनों ही मानते हैं किअपने ही कर्मों के आधार पर मनुष्य को अगला जन्म मिलता है ।2- दोनों पुर्नजन्म में विश्वास रखते हैं ।3- दोनों में ही सभी जीवधारियों के प्रति करूणा व अहिंसा के लिए कहा गयाहै ।4- दोनों में विभिन्न प्रकार के स्वर्ग व नरक को बताया गया है ।5- दोनों ही भारतीय हैं भगवान बुद्ध ने भी एक हिन्दू सूर्यवंशी राजा केयहां पर जन्म लिया था इनके वंशज शाक्य कहलाते थे । स्वयं भगवान बुद्ध नेतिपिटक में कहा है कि उनका ही पूर्व जन्म राम के रूप में हुआ था । 6-दोनों में ही सन्यास को महत्व दिया गया है । सन्यास लेकर साधना करन कोवरीयता प्रदान की गयी है ।7- बुद्ध धर्म में तृष्णा को सभी दुखों का मूल माना है । चार आर्य सत्यमाने गए हैं ।- संसार में दुख है- दुख का कारण है- कारण है तृष्णा- तृष्णा से मुक्ति का उपाय है आर्य अष्टांगिक मार्ग । अर्थात वह मार्गजो अनार्य को आर्य बना दे ।इससे हिन्दुओं को भी कोई वैचारिक मतभेद नहीं है ।8- दोनों में ही मोक्ष ( निर्वाण )को अंतिम लक्ष्य माना गया है एवं मोक्षप्राप्त करने के लिए पुरूषार्थ करने को श्रेष्ठ माना गया है ।दोनों ही पंथों का सूक्ष्मता के साथ तुलना करने के पश्चात यह निष्कर्षबड़ी ही आसानी से निकलता है कि दोनों के मूल में अहिंसा, करूणा,ब्रह्मचर्य एवं सत्य है । दोनों को एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता ।और हिन्दओं का केवल एक देश नहीं बल्कि 13 देश हैं ।इस प्रकार हम देखते हैं विश्व की कुल जनसंख्या में भारतीय मूल के धर्मोंकी संख्या 20 प्रतिशत है जो मुस्लिम से केवल एक प्रतिशत कम हैं । एवंहिन्दुओं की कुल जनसंख्या बौद्धों को जोड़कर 130 करोड़ है। है जो मुसलमानोंसे कुछ ही कम है । व हिन्दुओं के 13 देश थाईलैण्ड, कम्बोडिया म्यांमार,भूटान, श्रीलंका, तिब्बत, लाओस वियतनाम, जापान, मकाउ, ताईवान नेपाल वभारत हैं । इसी कारण जब लोग कहते हैं कि विश्व में केवल एक ही हिन्दू देशहै तो यह पूरी तरह गलत है यह बात केवल वे ही कह सकते हैं जो हिन्दू की

परिभाषा को नहीं जानते हैं ।

रवि शंकर यादव

Mobile. 9044492606, 857418514
http://twitter.com/aajsamaj
http://aaj-samaj.blogspot.com
http://aapki-awaz.blogspot.com

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Dec 24, 2010, 1:04:10 AM12/24/10

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आपके द्वारा एक और विद्वतापूर्ण लेख..पढ़कर कृतकृत्य हुआ

2010/12/23 Shankar Dutt Fulara <>

-- Thanks and Regards,Prakriti Aarogya KendraSpecialty Store of Organic, Ayurvedic, Herbal, Natural & Swadeshi ProductsShop No. 2, Buena Vista, Off Datta Mandir Chowk, Near Kailas Super MarketViman Nagar, Pune - 411014Contact Number : 020-40038542, 9822622905, 9881308509

Website www.prakritipune.in

 

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Dec 24, 2010, 2:00:43 AM12/24/10

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bhaiyo apna bharat sirf hinduokahi nahi hai.

Isame Muslim, sikh, isai aur bhi hai..

krupaya bharatko khali hundu rashtra sambodhakar kamjor mat baniye aur
banaiye. Hameto sabke sath lekar chalna hai

Rakesh Patil

Pune, Bharat

-- BE HAPPY & KEEP SMILING

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Dec 24, 2010, 3:02:36 AM12/24/10

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mein rakesh bhai se bilkul sehmat hoon.Sirf hindu ka hai bharat aisa bol kar kuch log Bharat Swabhiman Andolan ko hijack na karein. Mujhe toh kabhi kabhi aisa lagta hai ki congress/bjp wale Bharat Swabhiman mein ghuss gayein hai aur apna agenda idhar laa rahein hai. Bharat Swabhiman ka agenda bhartiyon ko ekatrit/unite/ek karna hai, na hi ki ladvana. Ravi Shanker ji, aapke post BSA forums se humne isi liye hataye the. aap se vinamra binti hai, aise article post naa karein. Jai Bharat.

2010/12/23 Rakesh Patil <>

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Dec 24, 2010, 3:04:31 AM12/24/10

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Me rakesh ji ke baat se bilkul so feeshadi sahamat hu.

dekho humari pahachaan to ye hai hai naa Unity in Diversity (Anekta me Aikata)

fir to hamko dharma wali baat nahi karni chahiye.

es desh ke sab tarah ke log rahate hai sab miljul ke es desh ko sone ki chidiya banayenge jo vishwa me anokha desh hoga.

aur ek unueq example bhi hoga vishwa ke liye.

jai bharat jai hind

2010/12/23 Rakesh Patil <>

bhaiyo apna bharat sirf hinduokahi nahi hai. Isame Muslim, sikh, isai aur bhi hai.. krupaya bharatko khali hundu rashtra sambodhakar kamjor mat baniye aur banaiye. Hameto sabke sath lekar chalna hai Rakesh Patil Pune, Bharat


On 12/23/10, Prakriti Aarogya Kendra <> wrote: > आपके द्वारा एक और विद्वतापूर्ण लेख..पढ़कर कृतकृत्य हुआ > >

> 2010/12/23 Shankar Dutt Fulara <>

> >> बिलकुल सही विश्लेषण किया है मैं इससे सहमत हूँ बहुत विद्वता पूर्ण आलेख | >> >> २३ दिसम्बर २०१० १२:४५ अपराह्न को, Ravi Shanker <

>> > ने लिखा:

>> >> जब लोग कहते हैं कि विश्व में केवल एक ही हिन्दू देश है तो यह पूरी तरह >>> गलत है यह बात केवल वे ही कह सकते हैं जो हिन्दू की परिभाषा को नहीं >>> जानते । इसके लिए सबसे पहले हमें यह जानना होगा कि हिन्दू की परिभाषा >>> क्या है ।

>>> हिन्दुत्व की जड़ें किसी एक पैगम्बर पर टिकी न होकर सत्य, अहिंसा

>>> सहिष्णुता, ब्रह्मचर्य , करूणा पर टिकी हैं । हिन्दू विधि के अनुसार >>> हिन्दू की परिभाषा नकारात्मक है परिभाषा है जो ईसाई मुसलमान व यहूदी नहीं >>> है वे सब हिन्दू है। इसमें आर्यसमाजी, सनातनी, जैन सिख बौद्ध इत्यादि सभी >>> लोग आ जाते हैं । एवं भारतीय मूल के सभी सम्प्रदाय पुर्नजन्म में विश्वास >>> करते हैं और मानते हैं कि व्यक्ति के कर्मों के आधार पर ही उसे अगला जन्म

>>> मिलता है । तुलसीदास जीने लिखा है परहित सरिस धरम नहीं भाई । पर पीड़ा सम >>> नहीं अधमाई । अर्थात दूसरों को दुख देना सबसे बड़ा अधर्म है एवं दूसरों को

>>> सुख देना सबसे बड़ा धर्म है । यही हिन्दू की भी परिभाषा है । कोई व्यक्ति

>>> किसी भी भगवान को मानते हुए, एवं न मानते हुए हिन्दू बना रह सकता है । >>> हिन्दू की परिभाषा को धर्म से अलग नहीं किया जा सकता । यही कारण है कि >>> भारत में हिन्दू की परिभाषा में सिख बौद्ध जैन आर्यसमाजी सनातनी इत्यादि >>> आते हैं । हिन्दू की संताने यदि इनमें से कोई भी अन्य पंथ अपना भी लेती >>> हैं तो उसमें कोई बुराई नहीं समझी जाती एवं इनमें रोटी बेटी का व्यवहार

>>> सामान्य माना जाता है । एवं एक दूसरे के धार्मिक स्थलों को लेकर कोई झगड़ा

>>> अथवा द्वेष की भावना नहीं है । सभी पंथ एक दूसरे के पूजा स्थलों पर आदर

>>> के साथ जाते हैं । जैसे स्वर्ण मंदिर में सामान्य हिन्दू भी बड़ी संख्या
>>> में जाते हैं तो जैन मंदिरों में भी हिन्दुओं को बड़ी आसानी से देखा जा

>>> सकता है । जब गुरू तेग बहादुर ने कश्मीरी पंडितो के बलात धर्म परिवर्तन >>> के विरूद्ध अपना बलिदान दिया तो गुरू गोविन्द सिंह ने इसे तिलक व जनेउ के >>> लिए उन्होंने बलिदान दिया इस प्रकार कहा । इसी प्रकार हिन्दुओं ने भगवान >>> बुद्ध को अपना 9वां अवतार मानकर अपना भगवान मान लिया है । एवं भगवान >>> बुद्ध की ध्यान विधि विपश्यना को करने वाले अधिकतम लोग आज हिन्दू ही हैं >>> एवं बुद्ध की शरण लेने के बाद भी अपने अपने घरों में आकर अपने हिन्दू >>> रीतिरिवाजों को मानते हैं । इस प्रकार भारत में फैले हुए पंथों को किसी >>> भी प्रकार से विभक्त नहीं किया जा सकता एवं सभी मिलकर अहिंसा करूणा >>> मैत्री सद्भावना ब्रह्मचर्य को ही पुष्ट करते हैं । >>> इसी कारण कोई व्यक्ति चाहे वह राम को माने या कृष्ण को बुद्ध को या >>> महावीर को अथवा गोविन्द सिंह को परंतु यदि अहिंसा, करूणा मैत्री सद्भावना >>> ब्रह्मचर्य, पुर्नजन्म, अस्तेय, सत्य को मानता है तो हिन्दू ही है । इसी >>> कारण जब पूरे विश्व में 13 देश हिन्दू देशों की श्रेणी में आएगें । इनमें >>> वे सब देश है जहाँ बौद्ध पंथ है । भगवान बुद्ध द्वारा अन्य किसी पंथ को >>> नहीं चलाया गया उनके द्वारा कहे गए समस्त साहित्य में कहीं भी बौद्ध शब्द >>> का प्रयोग नहीं हुआ है । उन्होंने सदैव इस धर्म कहा । भगवान बुद्ध ने >>> किसी भी नए सम्प्रदाय को नहीं चलाया उन्होनें केवल मनुष्य के अंदर >>> श्रेष्ठ गुणों को लाने उन्हें पुष्ट करने के लिए ध्यान की पुरातन विधि >>> विपश्यना दी जो भारत की ध्यान विधियों में से एक है जो उनसे पहले सम्यक >>> सम्बुद्ध भगवान दीपंकर ने भी हजारों वर्ष पूर्व विश्व को दी थी । एवं >>> भगवान दीपंकर से भी पूर्व न जाने कितने सम्यंक सम्बुद्धों द्वारा यही >>> ध्यान की विधि विपश्यना सारे संसार को समय समय पर दी गयी ( एसा स्वयं >>> भगवान बुद्ध द्वारा कहा गया है । भगवान बुद्ध ने कोई नया पंथ नहीं चलाया

>>> वरन् उन्होंने मानवीय गुणों को अपने अंदर बढ़ाने के लिए अनार्य से आर्य

>>> बड़ी ही आसानी से निकलता है कि दोनों के मूल में अहिंसा, करूणा,

>>> ब्रह्मचर्य एवं सत्य है । दोनों को एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता । >>> और हिन्दओं का केवल एक देश नहीं बल्कि 13 देश हैं । >>> इस प्रकार हम देखते हैं विश्व की कुल जनसंख्या में भारतीय मूल के धर्मों >>> की संख्या 20 प्रतिशत है जो मुस्लिम से केवल एक प्रतिशत कम हैं । एवं

>>> हिन्दुओं की कुल जनसंख्या बौद्धों को जोड़कर 130 करोड़ है। है जो मुसलमानों

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Dec 24, 2010, 6:53:43 AM12/24/10

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bahut badiya lekh haishandar haiHindu hona kisi dharma ya majhab se nahi hai...Hinduism is a way of life...Request the protesters to read the article to get the brotherhood feeling

2010/12/23 Komal Pandey <>

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Dec 24, 2010, 3:14:24 PM12/24/10

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hum apna majhab, dharma, way of life apne tak rakhein to bahut hi aacha hoga. filhal to desh ka way of life corruption hai, aur isko sudharne ke liye ekta chahiye aur kadak kanoon vyavastha. iss mein koi 2 rahein nahi ho sakti. hamein sirf bharat swabhiman par apni ekagrata badhani hai, na ki koi side issue par.

2010/12/24 निशांत <>

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Dec 24, 2010, 4:59:47 PM12/24/10

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हिन्दू एक धर्म नहीं है,यह एक दर्शन है.पुरे संसार में जो भी लोग इश्वर
की सत्ता में विश्वाश करते हैं,चाहे वो सगुण हो या निर्गुण,वो हिन्दू हैं

On Dec 23, 9:14 pm, dehydratedpaani <> wrote:> hum apna majhab, dharma, way of life apne tak rakhein to bahut hi aacha> hoga.>> filhal to desh ka way of life corruption hai, aur isko sudharne ke liye ekta> chahiye aur kadak kanoon vyavastha. iss mein koi 2 rahein nahi ho sakti.>> hamein sirf bharat swabhiman par apni ekagrata badhani hai, na ki koi side> issue par.>

> 2010/12/24 निशांत <>

>> > bahut badiya lekh hai> > shandar hai>> > Hindu hona kisi dharma ya majhab se nahi hai...Hinduism is a way of> > life...Request the protesters to read the article to get the brotherhood> > feeling>

> > 2010/12/23 Komal Pandey <>

>> >> Me rakesh ji ke baat se bilkul so feeshadi sahamat hu.>> >> dekho humari pahachaan to ye hai hai naa Unity in Diversity (Anekta me> >> Aikata)> >> fir to hamko dharma wali baat nahi karni chahiye.>> >> es desh ke sab tarah ke log rahate hai sab miljul ke es desh ko sone ki> >> chidiya banayenge jo vishwa me anokha desh hoga.>> >> aur ek unueq example bhi hoga vishwa ke liye.>> >> jai bharat jai hind>

> >> 2010/12/23 Rakesh Patil <>

>> >>> bhaiyo apna bharat sirf hinduokahi nahi hai.>> >>> Isame Muslim, sikh, isai aur bhi hai..>> >>> krupaya bharatko khali hundu rashtra sambodhakar kamjor mat baniye aur> >>> banaiye. Hameto sabke sath lekar chalna hai>> >>> Rakesh Patil>> >>> Pune, Bharat>

> >>> On 12/23/10, Prakriti Aarogya Kendra <> wrote:> >>> > आपके द्वारा एक और विद्वतापूर्ण लेख..पढ़कर कृतकृत्य हुआ>

> >>> > 2010/12/23 Shankar Dutt Fulara <>

>> >>> >> बिलकुल सही विश्लेषण किया है मैं इससे सहमत हूँ बहुत विद्वता पूर्ण आलेख> >>> |>> >>> >> २३ दिसम्बर २०१० १२:४५ अपराह्न को, Ravi Shanker <

> >>> >> > ने लिखा:

> ...>

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Dec 24, 2010, 5:16:29 PM12/24/10

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yeh aapka ka manana hai. kripiya aap ke pass rakhein.vishwa mein jitne bhi isware ki satta mein manane wale ho ya na ho (atheist), unka dharm sirf manavata hai. hindu, muslim, sikh, isayi, vagaira baad mein. Jai Bharat.

2010/12/24 Ravi Shanker Yadav <>

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Dec 24, 2010, 5:31:10 PM12/24/10

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साथियों ,

ये  क्या  विषय  लेकर  बैठ  गए  है  हम  लोग . कृपया  इसे  बंद  करें  और  भारत  स्वाभिमान  आन्दोलन  से  सम्बंधित   विचारों  को  राष्ट्रहित   में  प्रचार  करे . अगर   इन्टरनेट  का  उपयोग  हो  रहा  है  तो  कुछ  तथ्य  और  लेख  की  खोजबीन  करके  लोगों  की  ईमेल   ID पर  फॉरवर्ड  करे या अगर मोबाइल नंबर उपलब्ध है तो फ्री SMS सुविधा प्रदान करने वाली वेबसाइट का उपयोग करके हम SMS कर सकते है .

भारत  स्वाभिमान  हमारा  लक्ष्य  है. 

Contact  Numbers  :   92528-84207

क्या आप रुपये 280 लाख करोड़ प्राप्त करना चाहते हो? यदि हाँ तो रोजाना रात 8 .00 बजे से 9 .00 बजे तक आस्था चेंनल और रात 9 .00 बजे से 10 .00 बजे तक संस्कार चेनल देखिये

Do you want Rs. 280 Lakh Karod? If yes, see AASTHA Channel at night from 08-00 PM to 9.00 PM and SANSKAR Channel from 9.00 PM to 10.00 PM

http://www.bharatswabhimanyatra.com - swami Ramdev's Yatra Videos

http://www.bharatswabhimantrust.org - Bharat Swabhiman Official website 

2010/12/24 dehydratedpaani _ <>

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Dec 24, 2010, 5:44:07 PM12/24/10

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Greetings to all,I completely agree with Mr. Manzoor. We are not here to talk about religion n all. We are here to discuss about "BHARAT" and BHARAT is not a legacy to any of the religion and all of us will have to join our hands to make it as glorious as It ever happened and to make it positioned at the World's most powerful country. JAI BHARATABHSIHEK MITTALRAIPUR.

2010/12/24 Manzoor Khan Pathan <>